Zero Tax for 3 Years – अगर आप किसी सहकारी समिति (को-ऑपरेटिव) से जुड़े हैं या उसमें निवेश करते हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में फाइनेंस बिल पर चर्चा के दौरान बड़ा ऐलान किया। सरकार ने को-ऑपरेटिव डिविडेंड इनकम (लाभांश आय) पर अगले तीन साल के लिए टैक्स छूट देने का फैसला किया है। यानी अब सहकारी समितियों से मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स नहीं कटेगा और पूरी रकम सीधे आपके हाथ में आएगी।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने यह बदलाव क्यों किए हैं। उन्होंने कहा, “को-ऑपरेटिव, छोटे उद्योग (MSME) और किसान भारत की अर्थव्यवस्था के असली हीरो हैं। टैक्स में यह छूट देने का मकसद सिर्फ पैसा बचाना नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।”
क्या है सरकार का फैसला?
अब नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन से मिलने वाले डिविडेंड (मुनाफे का हिस्सा) पर अगले तीन साल तक कोई टैक्स नहीं देना होगा। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि गांव और शहरों के छोटे निवेशक और किसान ज्यादा से ज्यादा सहकारी समितियों से जुड़ें।
आपको क्या होगा फायदा?
- पूरी कमाई आपकी: अब तक को-ऑपरेटिव से मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स कटता था, जिससे हाथ में आने वाली रकम कम हो जाती थी। अब तीन साल तक पूरी राशि आपकी जेब में आएगी।
- छोटे निवेशकों को प्रोत्साहन: अगर आप कम पैसे निवेश करते हैं, तो यह टैक्स छूट आपके लिए अतिरिक्त बचत जैसी है।
- किसानों और MSME को मजबूती: ग्रामीण इलाकों में सहकारी समितियां ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। टैक्स छूट मिलने से इन समितियों के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिसका फायदा अंततः इसके सदस्यों (किसानों और छोटे उद्यमियों) को मिलेगा।
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आम आदमी और किसानों को कैसे होगा फायदा?
आम तौर पर, नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन और उनसे जुड़ी बड़ी समितियां इस दायरे में आती हैं। आइए जानते हैं किन प्रमुख संस्थाओं के सदस्यों को इसका सीधा फायदा मिलेगा:
खेती और खाद से जुड़ी समितियां
- IFFCO (इफको): यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद को-ऑपरेटिव है। इसके सदस्य किसानों या निवेशकों को डिविडेंड पर राहत मिलेगी।
- KRIBHCO (कृभको): खाद और बीज उत्पादन से जुड़ी इस बड़ी संस्था के लाखों सदस्य हैं।
डेयरी और दुग्ध उत्पादन
- GCMMF (Amul): अमूल भारत का सबसे सफल को-ऑपरेटिव मॉडल है। इससे जुड़े लाखों दुग्ध उत्पादकों को इस कदम से मजबूती मिलेगी।
- मदर डेयरी: यह भी को-ऑपरेटिव फ्रेमवर्क के तहत काम करती है।
बैंकिंग और फाइनेंस
- सारस्वत बैंक, एसवीसी बैंक और कॉसमॉस बैंक: ये बड़े अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक हैं। इनके शेयरधारकों को मिलने वाले लाभांश पर भी टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।
- स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक: राज्यों के सहकारी बैंक जो किसानों को लोन देते हैं।
अन्य प्रमुख संस्थाएं
- NAFED (नेफेड): यह कृषि उपज के विपणन के लिए राष्ट्रीय संस्था है।
- NCDC (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम): यह संस्था विभिन्न छोटी को-ऑपरेटिव सोसायटियों को फंड करती है।
- हाउसिंग सोसायटी और बुनकर समितियां: स्थानीय स्तर पर काम करने वाली ऐसी समितियां जो नेशनल फेडरेशन से जुड़ी हैं।
आपको क्या करना चाहिए?
यदि आप किसी को-ऑपरेटिव के सदस्य हैं, तो अपनी पासबुक या एनुअल रिपोर्ट में देख लें कि आपकी संस्था किसी ‘नेशनल फेडरेशन’ से संबद्ध है या नहीं। सरकार के इस तीन साल के टैक्स हॉलिडे का फायदा मुख्य रूप से उन्हीं डिविडेंड पर मिलेगा जो इन बड़ी संस्थाओं के माध्यम से आते हैं।
‘गलती’ पर भारी जुर्माने का डर खत्म
बिजनेस करने वालों के लिए भी एक अच्छी खबर है। अक्सर छोटी-मोटी ‘तकनीकी चूक’ (Technical Default) होने पर भारी जुर्माना लग जाता था। अब सरकार ने इसे ‘निश्चित शुल्क’ (Fixed Fee) में बदल दिया है। यानी अब जुर्माना मनमाना नहीं होगा, बल्कि एक तय फीस होगी। इससे व्यापारियों के लिए हिसाब-किताब रखना आसान होगा और वे बिना डरे काम कर सकेंगे।
बोनस गुड न्यूज: हवाई यात्रियों को भी राहत
एयरपोर्ट पर अक्सर यात्रियों और प्रशासन के बीच शुल्क या सामान को लेकर विवाद होते थे। सरकार ने ‘यात्री भत्तों’ (Passenger Allowances) को तर्कसंगत बनाया है। इससे एयरपोर्ट पर कागजी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और विवाद-मुक्त हो जाएगी।
