Iran Destruction Plan – मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जंग के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ’20 गुना’ ज्यादा ताकत से हमला करने की चेतावनी दी है। वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि इस रास्ते से गुजरने वाला हर जहाज जलकर खाक हो जाएगा। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ गई है।”
पूरा मामला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर है। यह दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल नली है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘अगर ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही रोकी, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों से 20 गुना ज्यादा खतरनाक हमला करेगा। हम ईरान के उन ठिकानों को तबाह कर देंगे, जिससे उसका एक राष्ट्र के रूप में दोबारा खड़ा होना नामुमकिन हो जाएगा।’
ट्रंप ने आगे लिखा कि यह अमेरिका की तरफ से चीन और उन सभी देशों के लिए ‘उपहार’ है जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम की सराहना की जाएगी।
ईरान की धमकी: ‘जलकर खाक हो जाएगा हर जहाज’
वहीं ईरान ने भी पीछे हटने का मूड नहीं दिखाया है। ईरान के पैरामिलिट्री रिवॉल्यूशनरी गार्ड के ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जब्बारी ने साफ कह दिया है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद हो गया है। अगर कोई भी जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा, तो ईरान उसे आग के हवाले कर देगा।’
क्यों इतना अहम है यह समुद्री रास्ता?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है क्या और क्यों इसको लेकर इतना हंगामा है? तो सुनिए, यह ओमान और ईरान के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन इसे ‘दुनिया का सबसे महत्वपूूर्ण तेल ट्रांजिट चोकपॉइंट’ यानी तेल का सबसे अहम संकरा रास्ता बताता है। इस रास्ते का सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है और जहाजों के आने-जाने के लिए सिर्फ दो मील तक का रास्ता है।
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कितना तेल गुजरता है इस रास्ते से?
वोर्टेक्स नाम की एनर्जी रिसर्च कंपनी के मुताबिक, हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से दुनिया में सप्लाई होता है।
सिर्फ तेल ही नहीं, कतर जैसे देश जो दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) उत्पादक हैं, वह भी अपनी गैस के निर्यात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
कितने जहाज फंसे?
तनाव के चलते इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है। खबरों के मुताबिक, दोनों छोर पर 700 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं।
भारत पर क्या असर?
भारत अपने ज्यादातर तेल का आयात इसी रास्ते से करता है। ऐसे में यह तनाव भारत के लिए भी सिरदर्द बन सकता है। खबरें हैं कि भारत अपने जहाजों को निकालने के उपायों पर विचार कर रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
अब देखना होगा कि यह तनाव किस ओर जाता है और क्या यह जंग का रूप लेता है या फिर बातचीत के जरिए हल निकलता है।”
