Ram Mandir – अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन से पहले आखिर थाईलैंड राम जन्मभूमि के लिए मिट्टी भेज रहा है। सांस्कृतिक तरीके से इसका बहुत ही खास महत्व माना जा रहा है। इससे पहले भी थाईलैंड के द्वारा थाईलैंड की दो नदियों से भगवान राम के मंदिर के लिए पानी भेजा गया था। डब्ल्यूएचएफ यानी विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष स्वामी विज्ञानानंद ने एएनआई से बातचीत के दौरान कहा की थाईलैंड के द्वारा भगवान राम को मानते हुए उनके द्वारा भेजी गई मिट्टी और पानी का महत्व बहुत ही गहरा है। इस अद्भुत संबंध से भारत और थाईलैंड के बीच के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूती मिलेगी। अयोध्या में तैयार किया जा रहे इस राम मंदिर को बहुत ही खास और भव्य बनाने के लिए तैयारी जोरों शोरों से की जा रही है।
जानिए राम मंदिर से जुड़ी खास जानकारी
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हिंदू धर्म के देवता रामलला का अद्भुत मंदिर बनाया जा रहा है यह मंदिर राम जन्मभूमि के स्थान पर बनाया जा रहा एक हिंदू मंदिर है। इस राम मंदिर की देखरेख श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र कर रहा है। इस मंदिर की शुरुआत 5 अगस्त 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन अनुष्ठान करके करी गई थी और उसके पश्चात मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था। वैसे तो इस मंदिर का मूल डिजाइन 1988 में अहमदाबाद के सोमपुरा परिवार द्वारा तैयार किया गया था। सोमपुर 15 पीढ़ियों से दुनिया भर के 100 से अधिक मंदिरों के डिजाइन बना चुका है।
जैसा की आप सभी को मालूम है अगले वर्ष 2024 में 22 जनवरी को रामलला का अभिषेक समारोह होने जा रहा है। इसी की तैयारी के लिए थाईलैंड से मिट्टी राम मंदिर जन्म भूमि के पवित्र स्थल पर भेजी जा रही है। स्वामी विज्ञानानंद का कहना है कि यह पहल विश्व हिंदू परिषद द्वारा वीएचपी के थाईलैंड चैप्टर के अध्यक्ष सुशील कुमार सराफ के द्वारा की जा रही है। इसके अलावा न्यूज़ 18 से बात करते हुए प्रमुख कारोबारी और थाई चैंबर ऑफ कॉमर्स के सलाहकार सुशील कुमार सराफ ने कहा कि हमने भी यहां बैंकॉक में श्री राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई है ताकि लोग प्रभु श्री राम के दर्शन कर सके। हमें भी अयोध्या में बन रहे श्री राम मंदिर के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रभु राम मंदिर के दर्शन के लिए बहुत से लोग वहां जाएंगे।
स्वामी विज्ञानानंद के अनुसार मिट्टी भेजे जाने के लिए दोनों देशों के बीच इसका सहयोग केवल मिट्टी भेजे जाने तक ही सीमित नहीं है। उनके अनुसार थाईलैंड और भारत के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन है। यहां के राजा भगवान राम के वंशज है। क्योंकि यहां के हर राजा के नाम के साथ राम की उपाधि भी है जो की एक यहां की पुरानी परंपरा है। थाईलैंड के अंदर बैंकॉक एशिया के दक्षिण पूर्व देश का हिस्सा है जहां समृद्ध हिंदू सांस्कृतिक विरासत मौजूद है। यही एकमात्र कारण है कि उन्होंने यहां विश्व हिंदू कांग्रेस आयोजित करने की योजना बनाई है।
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा की पूरी दुनिया में हमने 51 ऐसे देशों की पहचान की है जो अयोध्या में बन रहे भगवान राम मंदिर के अभिषेक के गवाह बनेंगे। भगवान राम के अभिषेक में मैं खुद और सुशील कुमार सराफ भी मौजूद रहेंगे। अगले साल 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर के अभिषेक पर खुशी व्यक्त करते हुए विश्व हिंदू कांग्रेस के मुख्य आयोजक स्वामी विज्ञानानंद ने एनआई को बताया की इस अभिषेक का बैंकॉक में सीधा प्रसारण किया जाएगा और दुनिया भर से लोग हिंदू कार्यक्रम, कीर्तन, भजन, पूजा और पाठ में जुटेंगे।
उन्होंने कहा कि हमने अयोध्या से प्रसाद (भगवान श्री राम को चढ़ाया जाने वाला भोजन)भी आर्डर किया है। उनके अनुसार यहां अयोध्या मंदिर की प्रतिकृति भी बनाई गई है और हम अयोध्या से रामलला के जन्म स्थान की एक तस्वीर भी लाए हैं। तस्वीर की कॉपियां सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों के साथ शेयर की जाएगी। अयोध्या के इस राम मंदिर के अभिषेक से पहले पूरे उत्सव का माहौल दुनिया भर में फैल जाना चाहिए। थाईलैंड का एक प्रसिद्ध शहर अयुत्या के नाम से जाना जाता था। जहां के राजा ‘ रामतीबोधि’ (भगवान राम) की उपाधि धारण करते थे। अयुत्या को उसे प्रसंग से जोड़ा गया है जिसमें रामायण में बताया गया है अयोध्या को भगवान राम की राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है।अयुत्या को 1767 में बर्मी सेनाओं ने लूट लिया था और लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।
