Kota Student Suicide Case: एक के बाद एक हो रहे स्टूडेंट सुसाइड के मामलो ने पेरेंट्स के दिलों में कोटा शहर को लेकर एक तरह का डर बैठा दिया है. अब नया मामला कोटा शहर का ही सामने आ रहा है जहां एक 20 वर्षीय कोचिंग इंस्टिट्यूट के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है. मामला बुधवार 8 जनवरी 2025 का है जब पिजी मालिक को मृतक अभिषेक का शव कमरे में पंखे से लटका मिला तो उसने तुरंत पुलिस को इस बात की सूचना दी.
विज्ञान नगर में किया सुसाइड
मृतक अभिषेक मूल रूप से एमपी के गुना का रहने वाला है. अभिषेक किराए पर एक पिजी रूम लेकर कोटा शहर के विज्ञान नगर इलाके में डकनिया रेलवे स्टेशन के पास अंबेडकर नगर में रह रहा था. अभिषेक पिछले ही साल में मई के महीने में कोटा शहर में रहने के लिए आया था. वह कोटा में रह कर जेईई एडवांस की तैयारी कर रहा था.
तुरंत पहुंची पुलिस
पिजी मालिक की कॉल करने पर पुलिस तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गई. विज्ञान नगर थाना सीआई मीणा ने बताया कि शव पंखे से लटका पाया गया और पंखे के अंदर किसी भी हैंगिंग डिवाइस को नहीं पाया गया. पुलिस को कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला हैइ सलिएआत्महत्या के कारणों का भी पता नहीं लग सका है. फिलहाल शव को अस्पताल के मोर्चरी में भिजवा दिया गया है और परिवारजन को सूचना दे दी गई है. एक बार परिवार के आने के बाद शव पोस्टमार्टम कर दिया जाएगा.की पुलिस इस मामले की जांच में लग चुकी है.
24 घंटे में दूसरा सुसाइड
अभी एक दिन पहले ही मंगलवार 7 जनवरी 2025 को भी कोटा शहर में एक सुसाइड का मामला सामने आया था, जहां एक 19 वर्षीय छात्र ने हॉस्टल में सुसाइड किया था. मृतक नीरज कोटा शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में एक हॉस्टल में किराए पर रहता था. नीरज मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ का निवासी था और कोटा में रहकर कोचिंग इंस्टिट्यूट से तैयारी कर रहा था.
सुसाइड से हुआ कोटा को नुकसान
कोटा अपने इंजीनियरिंग कोचिंग इंस्टीट्यूट के लिए जाना जाता है. देश भर से बच्चे आई.आई.टी में एडमिशन लेने के सपने से यहां आते हैं. बच्चे हैं एक या दो साल रुक कर तैयारी करते हैं और वापस अपने घर चले जाते हैं. कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट ने शहर को अपनी एक अलग ही पहचान दी है. कोटा एक आई.आई.टी फैक्ट्री के नाम से देश भर में जाना जाता है. कई वर्षों से बच्चों के यहां आने के सिलसिले से कोटा के कोने-कोने में हॉस्टल और किराए के कमरों जैसी सुविधाएं तैयार हो गई है. एक के बाद एक हो रहे सुसाइड मामलों की वजह से पैरंट्स ने अब अपने बच्चों को कोटा भेजना कम कर दिया है जिसकी वजह से यहां आधे से ज्यादा किराए के कमरे अब खाली पड़े हैं और शहर वासियों को बहुत भारी नुकसान हो रहा है.
