Sambhal Violence Row – जब से देश में वक़्फ़ बोर्ड को लेकर बहस छिड़ी हुई है , तब से रोज कोई न कोई आरोप प्रत्यारोप का दौर चले ही जा रहा है। इसी कड़ी में हाल फिलहाल हैदराबाद से AIMIM के संसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान ने काफी सुर्खियां बटोरी जहां उन्होने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सीधा सीधा आरोप लगाते हुए उनपर वक़्फ़ की ज़मीन हड़पने का इलज़ाम लगाया है। इसी दावे पर संभल के जिला डीएम की प्रतिक्रिया सामने आयी है , जहाँ उन्होने ओवैसी के इस दावे को सीधे सीधे तौर पर झूठ करार दिया है।

क्या है पूरा मामला ?
संभल हिंसा के बाद बैकफुट पर चल रही योगी सरकार , किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में नज़र नहीं आ रही है। चाहे वह प्राचीन बावड़ी की खुदाई हो या पुराने बंद पड़े मंदिरो को फिर से खोल देने की कार्यवाही , योगी सरकार अब जमकर फ्रंट फुट पर बैटिंग कर रही है। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश प्रशासन ने संभल ज़िले की जमा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसी चौकी को लेकर AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया है की यह चौकी वक़्फ़ की ज़मीन पर बन रही है। ओवैसी ने अपने इस दावे को और मजबूत करने के लिए कुछ दस्तावेज भी ऑनलाइन प्लेटफार्म X पर डाले हैं।
क्या कहा डीएम साहब ने ?
ओवैसी के इस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए संभल के जिला डीएम डॉ राजेंद्र पैंसिया ने पूरे दावे को सिरे से ख़ारिज कर दिया है। उन्होने कहा की पुलिस चौकी का निर्माण पूर्ण रूप से नियमो को ध्यान में रखते हुए ही किया जा रहा है। पैंसिया के अनुसार दो अधिवक्ता उनके पास कुछ दस्तावेज लेकर जरूर आये थे जो ज़मीन के मालिकाना हक़ को लेकर थे, पर जांच में उन दोनों दस्तावेजों को अन-रेजिस्टर्ड पाया गया। डीएम ने कहा की स्वंत्रता के बाद से लगातार यह ज़मीन नगर पालिका के स्वामित्व में रही है जिसके दस्तावेज उपलब्ध हैं। लेकिन अगर कोई नया दस्तावेज लेकर आता है तो वह उस नए दस्तावेज की भी जांच करेंगे।
आखिर क्या चल रहा है संभल में ?
दरअसल 24 नवंबर 2024 को संभल ज़िले में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद जमा मस्जिद के सर्वे के लिए जब ASI की टीम निकली तो उस पर स्थानीय लोगों द्वारा पथराव किया गया। यह विरोध कुछ ही समय में भयानक दंगे का रूप में लगभग पूरे संभल में फ़ैल गया जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई। विपक्षियों के लिए योगी सरकार पर निशाना साधने के लिए संभल हिंसा एक बड़ा हथियार बन गयी है। योगी सरकार जो अपनी मजबूत कानून व्यवस्था के लिए जानी जाती उसके लिए संभल हिंसा एक बड़े दाग की तरह देखि जा रही है। इन्ही वजहों से उत्तर प्रदेश प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और कानून व्यवस्था के साथ साथ अपनी छवि मजबूत करने में लगी हुई है।
