RBSE Topper Bus Drivers Son Scores 96% – मेहनत और लगन के आगे कोई भी मुश्किल छोटी हो जाती है। यह साबित किया है राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं परीक्षा में जयपुर के उन होनहार छात्रों ने, जिनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी, लेकिन उन्होंने हौसले की उड़ान भरकर शानदार सफलता हासिल की। बस ड्राइवर के बेटे ने न सिर्फ 95% से ज्यादा अंक हासिल किए, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पैसे नहीं, जज्बा चाहिए।
बस ड्राइवर का बेटा बना स्कूल का गौरव
भांकरोटा स्थित जयप्रकाश नारायण सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र अंकित साहनी ने 10वीं बोर्ड में 96% अंक हासिल कर अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया। अंकित के पिता मनोज साहनी बस ड्राइवर हैं। वह मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और साल 2010 में रोजगार की तलाश में जयपुर आए थे। तब से वह यहां रहकर बस चला रहे हैं।
कभी ट्यूशन नहीं ली, रोज 6-7 घंटे की पढ़ाई
अंकित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता, शिक्षकों और बड़ी बहन को दिया। उन्होंने बताया, “मैंने कभी कोई ट्यूशन नहीं की। रोज 6 से 7 घंटे पढ़ाई करता था। स्कूल में 7 दिन में एक छुट्टी आती थी, लेकिन मैंने पढ़ाई की कभी छुट्टी नहीं ली। चाहे घर में शादी हो या कोई प्रोग्राम, मैं नियमित रूप से पढ़ता था।”
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जिस संस्कृत से लगता था डर, उसमें मिले 100 में से 100
अंकित ने बताया कि उन्हें संस्कृत विषय से काफी डर लगता था। वह सोचते थे कि कहीं वह इस विषय में फेल न हो जाएं। लेकिन उन्होंने स्कूल की एक मैडम से अनुरोध करके संस्कृत की एक्स्ट्रा क्लास ली। इसका परिणाम यह रहा कि उन्हें संस्कृत में 100 में से 100 अंक मिले। अंकित इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं।
पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा
अंकित ने कहा, “पिताजी ने काफी संघर्ष करके हमें पढ़ाया है। वह 29 नंबर रूट पर बस चलाते हैं। हम तीन भाई-बहन हैं। पिताजी ने तमाम आर्थिक कठिनाइयों के बाद भी हमें पढ़ने में कोई कमी नहीं छोड़ी। मेरी बड़ी बहन लक्ष्मी साहनी ने मुझे पढ़ने के लिए हमेशा मोटिवेट किया।”
उन्होंने यह भी बताया कि जब उनकी मां ललिता देवी काम के सिलसिले में बिहार जाती हैं, तो वह अपनी बहनों को घर के कामों में हाथ बंटाते हैं। उन्होंने कहा, “आज के दौर में जहां बच्चे घर की सफाई को छोटा काम समझते हैं, मैं नियमित रूप से घर की सफाई करता हूं।”
