Pakistan Steps In as US-Iran Peace Broker – मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन अब इस युद्ध को खत्म करने के लिए एक नया मध्यस्थ उभरकर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ईरान जंग को खत्म करने के लिए संभावित मध्यस्थ के रूप में उभर सकता है। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ नेताओं की बैठक इस्लामाबाद में कराने का प्रस्ताव दिया है।
पाकिस्तान ने क्या प्रस्ताव दिया?
फाइनेंशियल टाइम्स की खबरों के हवाले से संवाददाता ने बताया है कि पाकिस्तान ने कथित तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए अपनी पेशकश की है। पाकिस्तान का प्रस्ताव है कि दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं की बैठक इस्लामाबाद में कराई जाए। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि न तो अमेरिका की ओर से हुई है और न ही ईरान की तरफ से।
पाकिस्तान क्यों बन सकता है मध्यस्थ? – Pakistan Steps In as US-Iran Peace Broker
अमेरिका के कई आला अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान का मध्यस्थ के तौर पर उभरना बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं है। इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं:
1. ईरान से करीबी रिश्ते: पाकिस्तान के ईरान के साथ पारंपरिक रूप से करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार और धार्मिक स्तर पर गहरे संबंध हैं।
2. अमेरिका से गर्मजोशी भरे रिश्ते: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान शहबाज शरीफ सरकार के अमेरिकी प्रशासन से भी रिश्ते गर्मजोशी भरे रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है।
3. जनरल आसिम मुनीर की मुलाकात: पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज जनरल आसिम मुनीर ने पिछले साल जून और सितंबर में ट्रंप से मुलाकात की थी। सितंबर की यात्रा के दौरान, जनरल मुनीर के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों का संकेत मानी जा रही है।
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ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए किया था नामित
पाकिस्तान ने पिछले साल जून और अक्टूबर में ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था। यह कदम उस समय उठाया गया था जब भारत के साथ झड़पों के दौरान ट्रंप ने मध्यस्थता की कोशिश की थी। शहबाज शरीफ के इस कदम को ट्रंप प्रशासन के कई लोगों ने काफी सराहा था। यह नामांकन पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियों का एक और उदाहरण था।
क्या होगी मध्यस्थता की अगली दिशा?
हालांकि फिलहाल अमेरिका और ईरान की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पाकिस्तान का यह प्रस्ताव ईरान-अमेरिका जंग में एक नया कूटनीतिक मोड़ पैदा कर सकता है। यदि यह मध्यस्थता सफल होती है, तो यह चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुके युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक मौका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान इस मध्यस्थता में सफल होता है, तो यह उसके लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी। यह न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में मदद करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम साबित होगा।
