Iran Crushes US 2 Jets 2 Helicopters Down Pilots Missing – ईरान-अमेरिका के बीच पाँच हफ्तों से चल रहा संघर्ष अब एक भयावह मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। बीते एक दिन में ईरान ने ऐसे कई हमले किए, जिनसे अमेरिकी सेना को करारा झटका लगा है। एक ओर दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया, तो दूसरी ओर दो बचाव हेलीकॉप्टर भी तबाह हो गए।
ईरानी मीडिया ने कुछ तस्वीरें जारी कर दावा किया है कि कुवैत स्थित ‘कैंप बुहरिंग’ पर हुए हमले में अमेरिकी सेना का भारी-भरकम CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। 28 फरवरी से शुरू इस जंग में यह पहला मौका है जब अमेरिकी वायु शक्ति को इतनी बड़ी क्षति पहुँची है, जिसने अमेरिका के ‘हवाई वर्चस्व’ के दावों को चुनौती दी है।
कैसे-कैसे हुए नुकसान, पढ़ें पूरा लेखा-जोखा
- F-15E स्ट्राइक ईगल ध्वस्त: ईरान की सीमा के अंदर एक अभियान के दौरान यह विमान गिर गया। इसमें सवार दो सदस्यों में से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरा लापता है। आशंका जताई जा रही है कि वह ईरान के किसी इलाके में छिपा हो सकता है।
- A-10 वारथॉग भी नहीं बचा: कुवैत के आसमान में एक अमेरिकी A-10 अटैक विमान को निशाना बनाकर गिराया गया। हालाँकि, इसके पायलट ने सुरक्षित बाहर निकलने में सफलता पा ली।
- बचाव हेलीकॉप्टर भी घायल: लापता पायलट की तलाश में भेजे गए दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर ईरान ने भारी गोलाबारी की। दोनों हेलीकॉप्टरों को क्षति पहुँची, लेकिन वे किसी तरह सुरक्षित वापस लौटने में कामयाब रहे। हालाँकि, इस दौरान कुछ जवान घायल हुए हैं।
- F-16 और टैंकरों में खराबी: एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को तकनीकी गड़बड़ी या हमले के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
ईरान का ‘पायलट शिकार’ अभियान
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में लापता अमेरिकी पायलट की खोज के लिए बड़ा अभियान छेड़ दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे युद्ध का ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया है। उनके अनुसार, अब लड़ाई का केंद्र ‘सत्ता परिवर्तन’ से हटकर ‘अमेरिकी पायलटों की तलाश’ पर आ गया है।
ईरानी अधिकारियों ने आम नागरिकों से पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने की अपील की है। एक क्षेत्रीय अधिकारी ने तो पायलट को जिंदा या मुर्दा पकड़ने वाले के लिए बड़े इनाम की घोषणा भी कर दी है।
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ट्रंप ने कहा- ‘जंग है, ऐसा होता रहता है’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन नुकसानों को हल्के में लेते हुए कहा कि यह युद्ध का हिस्सा है और ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इससे ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन सैन्य विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि ये घटनाएँ ट्रंप के उन दावों के बिल्कुल विपरीत हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर एयर डिफेंस वाले देश भी मोबाइल मिसाइलों और जमीनी गोलाबारी से बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा, लेकिन दो विमानों के गिरने ने इन दावों की पोल खोल दी है।
युद्ध थमने के नाम नहीं, पूरा मिडिल ईस्ट दहल रहा
फिलहाल संघर्ष विराम की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली वार्ता से भी इनकार कर दिया है, जिससे सीजफायर की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। वहीं, कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और बढ़ती तेल की कीमतों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
