मध्य पूर्व से एक के बाद एक कई बड़ी खबरें आ रही हैं। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का ऐलान किया है, तो दूसरी तरफ कतर की राजधानी दोहा में फिर से मिसाइल हमला हुआ है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ईरान अब अपने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा, लेकिन इसकी एक शर्त है। अगर पड़ोसी देशों की जमीन से ईरान पर हमला नहीं होगा, तो ईरान भी उन पर हमला नहीं करेगा। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति ने पिछले दिनों पड़ोसी देशों पर किए गए हमलों के लिए माफी भी मांगी है।
माफी के बाद भी हमला?
इस ऐलान के बाद कतर में लोगों के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा गया कि ‘सुरक्षा का खतरा खत्म हो गया है, स्थिति सामान्य हो गई है।’ लेकिन ठीक उसी वक्त कतर की राजधानी दोहा में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, एक मिसाइल को जमीन पर गिरने से पहले ही इंटरसेप्ट कर लिया गया।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सेना ने उस मिसाइल को इंटरसेप्ट किया जिसका टारगेट उनका देश था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह हमला किसने किया और कितनी मिसाइलें दागी गई थीं।
क्या सेना को नहीं मिली जानकारी?
सवाल उठ रहा है कि अगर ईरान के राष्ट्रपति ने हमले रोकने का ऐलान किया था, तो यह हमला कैसे हुआ? फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि अधिकारियों के बीच हुए फैसलों की जानकारी जमीनी सेना को दी गई या नहीं।
ईरान का रुख: न सरेंडर, न बातचीत
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ‘ईरान के बिना शर्त सरेंडर करने से पहले अमेरिका उससे बातचीत नहीं करेगा।’ इस पर ईरान के राष्ट्रपति ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘वे हमारे बिना शर्त सरेंडर के अपने सपनों को कब्र में ले जाएंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सेना इजरायल पर हमले जारी रखे हुई है।
ईरान में कौन संभाल रहा सत्ता?
आपको बता दें कि एक हफ्ते पहले सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद से ईरान में तीन लोगों की एक लीडरशिप काउंसिल सत्ता संभाल रही है। यह काउंसिल तब तक काम करेगी, जब तक नए सुप्रीम लीडर का नाम नहीं आ जाता।
इस काउंसिल में तीन लोग हैं:
- राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन – जो उदारवादी विचारधारा के माने जाते हैं।
- ज्यूडिशियरी के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई – जो कट्टरपंथी विचारधारा के हैं।
- सीनियर मौलवी अलीरेज़ा अराफ़ी – ये भी उग्र विचारधारा के हैं।
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियन को इस काउंसिल में किनारे कर दिया गया है और असली ताकत कट्टरपंथियों के हाथ में है। शायद यही वजह है कि राष्ट्रपति के माफी मांगने के बावजूद हमले जारी हैं।”
