Hair Fall Treatment – बाल झड़ना आज सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग इस परेशानी से जूझ रहे हैं। महिलाएं हों या पुरुष, गंजापन अब किसी को भी अपनी चपेट में ले रहा है। पुरुषों में इसे ‘मेल्स बाल्डनेस’ या चिकित्सा भाषा में ‘एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया’ कहा जाता है, जहां सिर के आगे के हिस्से से बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसक जाती है। लाखों रुपये के महंगे सीरम, तेल और उपचार आजमाने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पाती है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी सफलता हासिल कर ली है, जो गंजेपन की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।
लैब में उगे असली बाल, मचा हलचल
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए लैब के अंदर इंसानी कोशिकाओं से असली बाल उगाए जा सकते हैं। ये कोई नकली विग या आर्टिफिशियल फाइबर नहीं हैं, बल्कि शरीर की स्टेम सेल्स से तैयार किए गए पूरी तरह से प्राकृतिक बाल हैं। यह रिसर्च उन लाखों-करोड़ों लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं है, जो गंजेपन की वजह से कॉन्फिडेंस खो चुके हैं।
कैसे तैयार हुए लैब में बाल?
‘बायोकेमिकल एंड बायोफिजिकल रिसर्च कम्युनिकेशंस’ नाम की जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, वैज्ञानिक काफी समय से शरीर के बाहर बालों की जड़ों (हेयर फॉलिकल्स) को विकसित करने की कोशिश कर रहे थे। अब उन्हें सफलता मिल गई है। रिसर्चर्स ने स्टेम सेल्स की मदद से लैब की डिश में बाल उगाए हैं। इस प्रक्रिया में बायो-इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया, जिससे कोशिकाएं ठीक वैसे ही व्यवहार करती हैं, जैसे वे सिर की त्वचा के नीचे करती हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये बाल दिखने और संरचना दोनों में पूरी तरह प्राकृतिक हैं।
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हेयर ट्रांसप्लांट से कैसे बेहतर है यह तकनीक?
फिलहाल गंजेपन के इलाज के लिए हेयर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं। ट्रांसप्लांट में मरीज के सिर के पिछले हिस्से से बाल निकालकर खाली जगह पर लगाए जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त डोनर बाल नहीं हैं, तो ट्रांसप्लांट संभव नहीं हो पाता। लेकिन यह नई तकनीक इस समस्या से निजात दिलाती है। अब लैब में जितने चाहें उतने बाल उगाए जा सकते हैं और उन्हें मरीज के सिर पर ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। यह उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी, जिनके पास डोनर हेयर की कमी है या जो पूरी तरह गंजे हो चुके हैं।
कब तक आम लोगों को मिलेगा यह इलाज?
हालांकि यह शोध पूरी तरह से सफल रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके आम लोगों तक पहुंचने में अभी थोड़ा समय लग सकता है। फिलहाल यह प्रयोगशाला स्तर पर सफल हुआ है। अब वैज्ञानिक मानव परीक्षण (ह्यूमन ट्रायल) की तैयारी कर रहे हैं। सुरक्षा मानकों और सफलता दर की जांच के बाद ही इसे क्लीनिकल स्तर पर लाया जाएगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले कुछ वर्षों में यह तकनीक हेयर लॉस ट्रीटमेंट में क्रांति ला देगी। तब गंजापन अतीत की बात हो जाएगा और हर किसी के सिर पर घने बाल होंगे।
