Father-Son Kidnap Miracle Kidnappers Car Crash Reveals Story – हरियाणा के गुरुग्राम से एक ऑटो चालक और उसके दो मासूम बच्चों के अपहरण की सनसनीखेज वारदात का अंत उत्तर प्रदेश के बरेली में एक भयंकर सड़क हादसे के रूप में हुआ। अपहरणकर्ता फिरौती वसूलने की साज़िश रच रहे थे, लेकिन तबीयत उन्हें खुद ही कहीं और ले गई।
टक्कर ऐसी कि उड़ गए परखच्चे
रविवार की शाम बरेली-रामपुर हाईवे पर एक तेज़ रफ्तार बोलेरो ने आगे जा रहे ट्रक टैंकर को पीछे से टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि बोलेरो के टुकड़े-टुकड़े हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि गाड़ी में तीन युवकों के शव फंसे हुए थे, जबकि एक युवक और दो छोटे बच्चे अचेत अवस्था में थे। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस को घटना के तार हाथ लगने लगे, चौंकाने वाले राज खुलते गए।
हादसे ने बदली वारदात की दिशा
दरअसल, हादसे में घायल दो मासूम बच्चे और उनके पिता किसी और राज्य से अगवा किए गए थे। पुलिस को जब इस बात की भनक लगी, तो तुरंत हरियाणा के गुरुग्राम से संपर्क किया गया। पता चला कि 4 अप्रैल को गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-1 इलाके से ऑटो चालक मनोज और उसके दो बेटे—6 साल का मयूर और 3 साल का लक्ष्य—लापता हो गए थे। मनोज की पत्नी पूजा को बदमाशों ने फोन कर धमकी दी थी, “अगर पुलिस के पास गए तो लाशें उठानी पड़ेंगी।” डर के मारे पूजा ने कोई शिकायत नहीं की, लेकिन ऊपरवाले को कुछ और ही मंजूर था।
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प्रेम प्रसंग ने पाली आग
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि अपहरण के पीछे की वजह कोई आपराधिक गिरोह नहीं, बल्कि एक प्रेम प्रसंग था। मुख्य आरोपी मनमोहन (मृतक) मनोज की भांजी से प्रेम करता था और उससे शादी करना चाहता था। लेकिन मनोज को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसी रंजिश में मनमोहन ने अपने साथियों—सिकंदर, विशेष और प्रिंस—के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था।
बदमाश खुद ही बन गए शिकार
हादसे में मनमोहन, सिकंदर और विशेष की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि प्रिंस गंभीर रूप से घायल है। पुलिस ने प्रिंस से पूछताछ की तो सारे भेद खुलते चले गए। इसके बाद पुलिस ने फरीदपुर (हरियाणा) में नत्थू के घर से ऑटो चालक मनोज को सकुशल बरामद कर लिया। अब बच्चों का अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी मां पूजा ने उन्हें पहचान लिया है।
कानूनी कार्रवाई शुरू
बरेली पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी हरियाणा पुलिस को सौंप दी है। हरियाणा पुलिस की टीम बरेली पहुंच चुकी है और अब आगे की विवेचना वही करेगी। यह कहानी उस सच्चाई को दिखाती है, जहां अपराधी खुद अपने ही षड्यंत्र का शिकार बन गए।
