SMS Hospital Jaipur – जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) हॉस्पिटल में एमआरआई कराने गए प्रदेश के पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा नाराज होकर बिना जांच कराए लौट गए। उन्होंने अस्पताल में लंबी प्रक्रिया और इधर-उधर के चक्करों पर सवाल खड़े किए। पूर्व मंत्री के साथ हुई यह परेशानी आम मरीजों के लिए रोज की कहानी है। आरजीएचएस के 70 फीसदी मरीज जांच के लिए एक ही दायरे में 3 से 4 चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पूर्व मंत्री नाराज क्यों हुए?
26 मार्च को पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा रूटीन जांच के लिए एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे। धनवंतरी ओपीडी में डॉक्टर ने चेकअप किया और उन्हें एमआरआई जांच लिख दी। जब वह एमआरआई सेंटर पहुंचे तो वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें बताया कि पहले आरजीएचएस के तहत टीआईडी नंबर जनरेट कराना होगा और इसके लिए उन्हें वापस धनवंतरी ब्लॉक जाना होगा।इस बात पर पूर्व मंत्री भड़क गए। उन्होंने कहा, “अगर कोई बुजुर्ग या गंभीर हालत में मरीज ट्रॉली पर आया हो और उसे चलने-फिरने में दिक्कत हो, तो क्या उसे भी इसी तरह इधर-उधर चक्कर काटने पड़ेंगे?”
400 मीटर के दायरे में 4 चक्कर – मरीज ने खुद बताया अपना अनुभव
यहां सबसे पहले ओपीडी पर्ची सेंटर पर दर्जनों काउंटर बने हैं और लंबी कतारें लगी हैं। ऑपरेटर आधार कार्ड या जनआधार से रजिस्ट्रेशन कर रहे थे।
प्रहलाद नाम के मरीज ने बताया पूरा सफर–
प्रहलाद की पत्नी कमला के एड़ियों में सूजन है। डॉक्टर ने सिटी स्कैन कराने को कहा। उन्होंने पूरी प्रक्रिया इस तरह बताई:
- धनवंतरी ओपीडी में डॉक्टर से दिखाया।
- सिटी स्कैन सेंटर (400 मीटर दूर) पहुंचे, लाइन लगाई।
- कर्मचारी ने बताया- पहले RGHS का टीआईडी जनरेट कराओ।
- वापस धनवंतरी ब्लॉक के फर्स्ट फ्लोर पर आए, RGHS काउंटर पर टीआईडी जनरेट कराया और लाइव फोटो लिया।
- फिर से सिटी स्कैन सेंटर पहुंचे।
ओपीडी पर्ची से लेकर टीआईडी जनरेट तक की प्रक्रिया में ही 3 घंटे लग गए। 400 मीटर के दायरे में 4 चक्कर लग गए।
प्रहलाद ने कहा, “डॉक्टर ने कहीं यह नहीं बताया कि पहले टीआईडी जनरेट कराना है। यहां साइन बोर्ड भी नहीं लगे। मरीजों को पता ही नहीं चलता कि कहां जाना है।”
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सामान्य मरीजों की भी नहीं है सुगमता
सिर्फ RGHS मरीज ही नहीं, आम मरीजों को भी चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर डॉक्टर एमआरआई या कोई जांच लिखता है, तो उस पर्ची पर यूनिट हेड के साइन होने भी जरूरी हैं। यह जानकारी कहीं भी साइन बोर्ड पर नहीं लिखी है।
मरीज सीधे जांच सेंटर पहुंच जाते हैं। वहां जाकर पता चलता है कि पहले यूनिट हेड के साइन लेने हैं। फिर मरीज यूनिट हेड को तलाशने लगता है। अगर समय पर मिल गए तो ठीक, नहीं तो चक्कर लगते रहो।
जांच के बाद भी 12 घंटे का इंतजार
टीआईडी जनरेट करा लिया जाए या यूनिट हेड के साइन करा लिए जाएं, तब भी जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में यह इंतजार 12 घंटे तक हो सकता है।
हॉस्पिटल प्रशासन का क्या कहना है?
एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने बताया कि धनवंतरी ब्लॉक के फर्स्ट फ्लोर पर ही RGHS का काउंटर बनाया गया है, ताकि मरीजों को इधर-उधर न भटकना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश हैं कि 75 साल से कम उम्र के RGHS मरीजों का लाइव फोटो अनिवार्य है। फोटो अप्रूव होने के बाद ही टीआईडी नंबर जनरेट होता है। हालांकि, इमरजेंसी, ट्रॉमा और इनडोर में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह प्रक्रिया जरूरी नहीं है।
पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा की यह घटना एसएमएस हॉस्पिटल की अव्यवस्था को उजागर करती है। मरीजों को जांच के लिए एक ही परिसर में बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कोई साइन बोर्ड नहीं है, कोई सही मार्गदर्शन नहीं है। RGHS के 70 फीसदी मरीजों को यही परेशानी रोज झेलनी पड़ती है। प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था सुधारी जा रही है, लेकिन आम मरीजों की परेशानी फिलहाल जस की तस बनी हुई है।
