Travel Ban to Turkey & Azerbaijan – ऑपरेशन सिंदूर के समय चीन और तुर्की ने पाकिस्तान का भरपूर साथ दिया। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हमले में उपयोग में लिए गए ड्रोनों को तुर्की और अज़रबैजान से खरीदा था। इन ड्रोन और मिसाइलों की भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा निकाल दी। भारत के पास अभी भी पाकिस्तान द्वारा छोड़ी गई मिसाइल और ड्रोन के अवशेष मौजूद है। भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया हो लेकिन चीन और तुर्की के अलावा अज़रबैजान का भी चेहरा बेनकाब हुआ है। इस देश ने पाकिस्तान का भाई जान बनकर उसका समर्थन किया था।
आपको हम यह बता दे इन दोनों देशों के अंदर भारत की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा योगदान है। एक तरफ चीन जहां भारत में सस्ता माल बेचकर बड़ी कमाई करता है वही तुर्की और अज़रबैजान भारत के टूरिस्ट से मोटा पैसा कमाते हैं। अब यह मुद्दे की बात यह है कि यह देश कमाई तो भारत से करते हैं लेकिन वह उस कमाई का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रहे हैं इसलिए भारत के लोगों ने इनका बॉयकॉट करना शुरू कर दिया है। भारत के व्यापारियों के संगठनों ने, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने भी भारत के व्यापारी और लोगों से यह निवेदन किया है कि लोग तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का पूरी तरीके से बहिष्कार करें क्योंकि उन्होंने हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान का साथ दिया है।
चीनी सामानों का बहिष्कार पहले से जारी
CAIT ने पहले से ही चीन के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चला रखा है। अब इसी तरह हमें तुर्की और अजरबैजान के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करना है। हमारा संगठन इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ट्रैवल और टूर ऑपरेटर के साथ सहयोग करेगा।
CAIT के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने यह अपील करी कि हमें पाकिस्तान के भाईजान तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना है क्योंकि इन देशों की अर्थव्यवस्था टूरिस्ट पर ही टिकी हुई है जिससे उनकी अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी।
3 लाख टूरिस्ट का होगा नुकसान (Travel Ban to Turkey & Azerbaijan)
2024 के आंकड़ों से पता चलता है कि तुर्की में करीब 62.2 मिलियन विदेशी टूरिस्ट आए थे जिसमें से करीब 3 लाख टूरिस्ट केवल भारत से थे। यदि हम 2023 से इसकी तुलना करें तो भारतीय पर्यटकों में 20.7% की वृद्धि हुई है। तुर्की का पर्यटन से कुल रेवेन्यू तकरीबन 61.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसमें से हर एक भारतीय टूरिस्ट लगभग 972 डॉलर खर्च करता है और भारतीयों के द्वारा खर्च किया जाने वाला कुल व्यय 291.6 मिलियन डॉलर है।
अगर भारतीय टूरिस्ट तुर्की का बहिष्कार करते हैं तो तुर्की को तकरीबन 291.6 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा। इसके अलावा भारतीय शादी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कॉर्पोरेट कार्यक्रमों के रद्द होने से अप्रत्यक्ष रूप से और भी अधिक आर्थिक नुकसान होगा। तुर्की ने भारत के खिलाफ अपना रंग दिखाया है जबकि 2 साल पहले तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप में भारत ने दिल खोलकर मदद की थी। तुर्की की जीडीपी में 12% हिस्सा पर्यटन का है।
यदि हम अजरबैजान की बात करें तो इस देश में 2024 में कुल 26 लाख विदेशी टूरिस्ट आए हैं उनमें से 2.5 लाख टूरिस्ट भारतीय थे। एक भारतीय टूरिस्ट द्वारा अजरबैजान में 2170 AZN यानि 1276 अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाते हैं। अज़रबैजान में भारतीय लोगों का कुल योगदान तकरीबन 308.6 मिलियन डॉलर हुआ है। यदि हम अज़रबैजान का बहिष्कार करते हैं तो उन्हें यह सीधा नुकसान हो सकता है।अजरबैजान की जीडीपी में पर्यटन का 10% हिस्सा है।
