LPG की किल्लत के बीच अब केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश की तीन सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने गैस उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का ऐलान किया है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने मंगलवार को एक साझा बयान जारी किया। इन कंपनियों ने कहा है कि उन्होंने LPG का उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी गैर-घरेलू क्षेत्रों के लिए इसकी उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
दरअसल, ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग पर दबाव बढ़ गया है। यह होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के ज्यादातर तेल और गैस की सप्लाई होती है। भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, और इस आयात का 85-90 फीसदी पश्चिम एशिया से होता है।
सरकार का सख्त आदेश
केंद्र सरकार ने एक दिन पहले सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे अपने प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रॉपलीन और ब्यूटेन आउटपुट को पूरी तरह से LPG उत्पादन के लिए इस्तेमाल करें। साथ ही पूरा उत्पादन इन तीनों कंपनियों को सप्लाई करने को कहा गया है। ये तीनों कंपनियां देश के घरेलू LPG का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सप्लाई करती हैं।
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चेतावनी भी जारी
सरकार ने साफ कहा है कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स ऑर्डर 1999 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्या बदलेगा आम आदमी के लिए?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने नए LPG सिलेंडर की बुकिंग की अवधि भी बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। पहले यह अवधि 21 दिन थी। पिछले हफ्ते ही घरेलू LPG के दाम में 60 रुपये और कमर्शियल LPG के दाम में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
कंपनियों का कहना है कि दूसरे गैर-घरेलू क्षेत्रों की मांगों की समीक्षा एक कमेटी करेगी और जरूरत व उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।
तो फिलहाल इतना समझ लीजिए कि सरकार स्थिति को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन होम उपभोक्ताओं को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ सकता है।”
